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मुंबई में मानसून का कहर जारी, जलजमाव से लोगों की बढ़ी दिक्कतें

मुंबई। Mumbai Rain Live Updates  मायानगरी मुंबई में मानसून की बारिश का कहर अभी भी जारी है। मंगलवार रात से हो रही बारिश के कारण यहां सड़कें दरिया में बदल चुकी है जिससे बच्चों और बड़ों सभी को अपने गंतव्यों तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुंबई के अंधेरी में भारी वर्षा के बाद दृश्यता कम होने के कारण तीन कारें आपस में टकरा गयी, जिसमें आठ लोग घायल हो गए। लगातार हो रही भारी बरसात के कारण सायन रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। मुंबई के किंग्स सर्कल और सायन की गांधी मार्केट में घुटनों तक पानी भर गया है।

 

ट्रेन सेवा प्रभावित

सेंट्रल रेलवे के सभी चार कॉरिडोर पर उपनगरीय ट्रेन सेवाएं चल रही हैं। हालांकि, इस खंड के निचले इलाकों में जल भराव के कारण कुर्ला और सायन के बीच मुख्य लाइन पर  ट्रेन सेवा 10 से 15 मिनट की देरी से चल रही हैं।

 शहर में भारी बारिश के बाद मुंबई के किंग्स सर्कल इलाके में सड़कों पर जलभराव हो गया।

भारी वर्षा के बाद दृश्यता कम होने के कारण तीन कारें आपस में टकरा गयी, जिससे आठ लोग घायल हो गए। 

पानी में डूबी सायन की सड़कें। 

शहर में भारी वर्षा के बाद, सायन रेलवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक जलमग्न हो गया।

सायन की गांधी मार्केट में घुटनों तक पानी 

जलभराव का कारण

मुंबई में जलभराव का दूसरा कारण मानव निर्मित है। आज की मुंबई कभी समुद्र के अंदर बसे सात द्वीपों का समूह हुआ करती थी। पहले पुर्तगालियों ने, तो बाद में अंग्रेजों ने, और उसके बाद आजाद भारत के  शासनकर्ताओं ने इन सातों द्वीपों के बीच की समुद्री खाड़ियों को पाटकर इसे तीन तरफ समुद्र से घिरे एक भूखंड का रूप दे दिया। मुंबई के पश्चिमी छोर पर जहां लहराता अथाह अरब सागर नजर आता है, वहीं पूर्वी छोर पर ठाणे-नई मुंबई-शिवड़ी आदि बस्तियों के घेरे बड़ी-बड़ी समुद्री खाड़ियां नजर आती हैं।

बांद्रा रिक्लेमेशन, बैकबे रिक्लेमेशन और नरीमन प्वाइंट जैसे कई स्थान तो बाकायदा समुद्र को पाटकर ही बसाए गए हैं। इस प्रकार समुद्र को पीछे ढकेलते हुए कभी नहीं सोचा गया कि इसके दुष्परिणाम क्या होंगे। यहां तक कि पक्की सड़कें बनाते समय उसके दोनों ओर बनाए गए फुटपाथ भी कच्चे नहीं छोड़े गए। यानी धरती में पानी सोखने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए। कभी मुंबई में 22 पहाड़ियां हुआ करती थीं। इनमें से ज्यादातर को काट-तोड़कर वहां बस्तियां बसा दी गई हैं। इन बेतरतीब बस्तियों को बसाते समय जलनिकासी का कोई ध्यान नहीं रखा गया। आबादी लगातार बढ़ती गई है। यही कारण है कि आज जब तेज बरसात होती है, समुद्र शहर का पानी शहर को लौटाने लगता है तो मुंबई पानी-पानी होती नजर आने लगती है।

Hind Brigade

Editor- Majid Siddique